शिव पुराण के अनुसार, राजा दक्ष की पुत्री माता सती भगवान शिव की अर्धांगिनी थीं। जब राजा दक्ष ने यज्ञ में भगवान शिव का अपमान किया, तब माता सती ने उस अपमान को सहन न करते हुए यज्ञ स्थल पर योगाग्नि द्वारा देह त्याग किया।
इस घटना के बाद भगवान शिव गहन विरक्ति में चले गए। तत्पश्चात माता सती ने ही पर्वतराज हिमालय के यहाँ माता पार्वती के रूप में जन्म लिया। यह वर्णन शिव पुराण में विस्तार से मिलता है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पुनः प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की।
माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। शिव पुराण तथा स्कन्द पुराण में वर्णित है कि देवताओं की उपस्थिति में हिमालय के यहाँ शिव-पार्वती विवाह संपन्न हुआ।
महाशिवरात्रि के संदर्भ में शिव-शक्ति का प्रसंग मुख्य रूप से शिव पुराण में वर्णित है।
शिव पुराण में वर्णित इन प्रसंगों के आधार पर महाशिवरात्रि की रात्रि को शिव-शक्ति के दिव्य मिलन से जोड़ा जाता है। इस दिन व्रत, जप और रात्रि जागरण का विधान बताया गया है।
महाशिवरात्रि की तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम ~05:04 बजे
तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम ~05:34 बजे
इसका मतलब है कि पूरी रात 15–16 फरवरी को महाशिवरात्रि का समय है।
आप पूजा चार भागों में कर सकते हैं
16 फरवरी 2026 की सुबह बाद
पारण का समय सुबह में शुरू होता है (लगभग 07:49 बजे के बाद)
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
शिवलिंग पर जल और पंचामृत अर्पित करें
बेलपत्र चढ़ाएँ
“ॐ नमः शिवाय” का 108 जप करें
रात्रि में जागरण रखें
✔ सात्विक आहार
✔ संयम और जप
✔ क्रोध से दूर रहें
यदि आप पंचांग अनुसार संकल्प, गोत्र उच्चारण और रुद्राभिषेक कराना चाहते हैं, तो
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